धर्म राज्य में राज्य मनमाना काम नही क्र सकता उसे धर्म क हिसाब से चलना होता है ! हमारा देश धर्म प्रधान है लेकिन देखा जय तो आज धर्म के दूर देश का सञ्चालन हो रहा है १ जिससे की आज विक्रत परिस्थितिया निर्मित हो रही है ! यह हम धर्म शब्द का तात्पर्य मंदिर मस्जिद से नही है ! उपासना व्यक्ति -धर्म का एक अंग हो सकती है किन्तु धर्म तो व्यापक है !रिलिजन यानि मत, पंथ,मजहब यह सब धर्म नही ! धर्म तो एक व्यापक चीज होती है !उससे समाज की धारणा होती है !उससे आगे बढ़े तो सस्ट्रि की धारणा होती है !यह धारणा करने वाली जो चीज होती है वह ' धर्म ' है !
No comments:
Post a Comment